
झारखंड में राज्य सरकार ने गरीबों को ठंड से बचाने के लिए जिसके लिए हेमंत सोरेन सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य सरकार में पारंपरिक कम्बल की जगह पर अब उच्च स्तरीय गुणवत्ता वाले में कंबल का वितरण किए जाने का फैसला लिया है यह फैसला राज के गरीबों के लिए राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा जबकि है राजकीय सरकारी खर्च और वस्तुओं को गुणवत्ता पर भी मध्य नजर रखता है।
योजना का लक्ष्य
इसमें राज्य सरकार ने राज्य के सभी लाखों जरूरतमंद लोगों को एवं गरीब लोगों को कमल पहुंचने का एक महत्वपूर्ण निर्णय है जिसमें राज्य में कुल 920245 नीलकमल का वितरण किया जाना है जिसका वितरण की तिथि 15 दिसंबर तक राज्य के सभी जिलों का वितरण का निर्देश दे दिया गया है जिसमें से धनबाद में कुल 75 हजार कंबल बांटे जाएंगे जो सबसे अधिक है वहीं अन्य जिले में जैसे पलामू में 54115 कंबल और गढ़वा जिले में 36901 कंबल बांटे जाएंगे और वही लातेहार में 20280 कंबल का वितरण किया जाएगा।
लागत एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान
जो राज्य सरकार के इसकी प्रभावशाली और सरकार की खजाने पर पड़ने वाले भोज को अपने अन्य विशेषण गंभीर सवाल खड़े करते हैं जिसमें पिछली बार उन्हें कंबल सरकार ने 375 प्रति मिनट की दर से खरीदे थे वही ऊनी कंबल की कीमत ₹800 प्रति यूनिट से मिलना संभव है जिससे अब राज्य सरकार के खजाने पर ढाई गुना अधिक बोझ पड़ेगा ।
जिसे मैं विशेषज्ञ के अनुसार मिंक कंबल मैं एक परसेंट भी उन नहीं होता या पूरी तरह से पॉलिएस्टर सामग्री का बना होता है वही यह ऊनी कंबल इतना गर्माहट प्रदान नहीं कर पाएगा जो ठंड की मार झेल रहे गरीबों के लिए बड़ी कमी हो सकता है।
आपूर्ति में देरी
जिसमें मिंक कंबल की साइज 60*90 इंच है वही वजन 2 किलोग्राम विशेष रूप से है जो यह आमतौर पर खुले बाहर में नहीं मिल पाएगा जो इसे विशेष रूप से ऑर्डर देखकर तैयार करना पड़ेगा जिसमें आसंका जुदाई जा रही है कि इस व्यवस्था के लिए आपूर्ति में देरी होगी।
जिसमें झारखंड सरकार पर या कम गरीबों के आदमी का आकर्षण देने वाले कंबल देने की मनसा विशेष रखता है लेकिन इसे लागत के कारण ठंड को काम करेगा या और उसके लिए बढ़ाएगी।