
झारखंड राज्य के गढ़वा जिला और पलामू में बालू घाटों की नीलामी लगातार तीसरी बार सफल रहा जिसमें 12.80 प्रति सीएफटी की दर बनी सबसे बड़ी बाधा जिसमें झारखंड के पलामू और गढ़वा जिलों का निर्माण कार्य पर गंभीरता के खतरा मथुरा रहा है या बालू घाटों के आवंटन के लिए आयोजित की गई नीलामी प्रक्रिया लगातार तीसरी बार असफल हो गई जिससे दोनों जिलों में बालू का संकट का खतरा मर्डर रहा है।
कीमत में गिरावट के बावजूद भी खरीदार नहीं
जिसमें न्यूनतम राशि में भारी कमी के कारण जिला कारण विभाग ने के ठेकेदारों ने आकर्षित करने के लिए न्यूनतम सुरक्षा राशि को 13 करोड़ से घटकर 47 लाख कर दिया गया था लेकिन तभी इतनी बड़ी कटौती के बावजूद भी एक भी ठेकेदार नीलामी में भाग लेने या आवेदन करने के लिए रुचि नहीं दिखाएं।
जिसमें नीलामी के बार-बार फेल होने का सबसे मुख्य कारण कारण है कि झारखंड में बालू की अत्यधिक कीमत है जो पड़ोसी राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश की तुलना में लगभग दुगनी है जिसमें बिहार चार रुपए प्रति क्विंटल सीएफटी है जबकि उत्तर प्रदेश में 7 रुपए प्रति क्विंटल सेफ्टी है जबकि झारखंड में 12.80 रुपए तय की गई है इसके बाद प्रशासन अब गति विरोध को तोड़ने के लिए कदम उठा रहा है जिसमें जिला खनन विभाग को इस मामले में अगली कार्रवाई के लिए खनन निदेशालय के दिशा निर्देश की मांग की