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डंडई प्रखंड (गढ़वा) में गहराया शिक्षण संकट: 11,597 बच्चों पर सिर्फ 211 शिक्षक, कई स्कूल ‘शिक्षक-विहीन’

गढ़वा जिला के डंडई प्रखंड के अंतर्गत अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों का पढ़ना मुश्किल हो रहा है जिसमें प्रखंड में कुल 70 विद्यालय है जिसमें से एक मदरसा यानी कि कल 71 सरकारी विद्यालय संचालित की गई है जिसमें से 1 से 5 तक के कक्षा में 7798 बच्चे हैं और वही 6 से 8 क्लास तक के 3799 बच्चे नामांकित है जिसमें से कल नामांकित बच्चों की संख्या 11597 है वही प्रखंड मैं सरकारी शिक्षकों की संख्या 48 एवं पर शिक्षकों की संख्या 163 है जिसमें से कई शिक्षक को का सहायक आचार्य के पद पर सिलेक्शन भी हो गया है वही आंकड़ों के अनुसार शिक्षक ऑन की कमी के कारण इधर एजुकेशन के तहत प्रति शिक्षकों पर 30 बच्चों का है लेकिन यहां प्रखंड में अनुमान के अनुसार 60 बच्चों पर एक शिक्षक यहां है जिसमें से बच्चे का भविष्य सुधारने का दवा लगभग फेल होता नजर आ रहा है वही डंडई प्रखंड के अंतर्गत स्थित रू के पत्थर लव पंचायत के अंतर्गत स्थित स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है जिससे उक्त विद्यालय में या गंभीर संकट बन गया है वह शिक्षा के दौर में बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जा रहे हैं यह एक गंभीर समस्या बन गया है वही विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आशीष कुमार ने इस संबंध में बात करते हुए शिक्षक भेजने की मांग की है ताकि बच्चों की अच्छी शिक्षा मिल सके।

जिसमें डंडई प्रखंड के रारो पंचायत के एकमात्र शिक्षक थे जो प्राथमिक विद्यालय में पतला ही टोला में नामांकित कल 92 बच्चों का शिक्षा दे रहे थे लेकिन उनका अब सहायक आचार्य पद पर नियुक्ति हो गई जिससे के बाद में पलामू के दूसरे विद्यालय में चले गए इसके बाद से विद्यालय की पूरी अर्थव्यवस्था विहीन हो गई और इधर बच्चों को पढ़ने के लिए दो-तीन दिनों से ब्रा की ओर से अस्थाई रूप से शिक्षक भेजे गए लेकिन इसके बाद या यह अभी व्यवस्था पूरी तरह से बंद हो गई जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई ही वंचित नहीं हो रहे हैं उनके जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है और वही विद्यालय का नियमावली संचालन भी कमी हो रही है शिक्षक के न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से बाधित हो गई है वह ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे विद्यालय पहुंचने तो है मगर कक्षा संचालन नहीं होने के कारण उन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ता है वही तो कई बच्चे ऐसे हैं जो पूरे दिन खेल कर समय व्यतीत कर रहे हैं वही कई बच्चों ने स्कूल भी जाना बंद कर दिया है।

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